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“बलदेव का किरदार निभाने के बाद मैं खुद भी ऑनलाइन दुनिया में और ज्यादा सावधान हो गया हूं,” कहते हैं सुधांशु पांडे, कलर्स के शो ‘दो दुनिया एक दिल’ में

नई दिल्ली : कलर्स का शो ‘दो दुनिया एक दिल’ प्रीमियर से ही दर्शकों के दिलों में जगह बना चुका है। यह कहानी उस दुनिया की है जहां ऑफलाइन और ऑनलाइन ज़िंदगी सबसे अप्रत्याशित तरीके से टकराती है। इस कहानी के केंद्र में है शिवाय (विक्रम सिंह चौहान), जिसने अपनी ज़िंदगी का सपना इस विश्वास पर बनाया था कि टेक्नोलॉजी इंसानों की मदद कर सकती है। लेकिन एक खतरनाक डिजिटल स्कैम उसकी पूरी दुनिया उजाड़ देता है। वहीं है आध्या (राची शर्मा), एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, जिसकी पहचान ही ऑनलाइन दुनिया से बनी है। दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, फिर भी प्यार इन दोनों को जोड़ देता है। लेकिन असली ट्विस्ट तब आता है जब पता चलता है कि आध्या, बलदेव सिंह (सुधांशु पांडे) की बेटी है वही शख्स जिसने शिवाय की ज़िंदगी तबाह कर दी। इस डिजिटल दौर में, जहां सच हर पल बदल सकता है और भरोसा एक क्लिक में टूट सकता है, बलदेव सबसे खतरनाक किरदार बन जाता है। सुधांशु पांडे बताते हैं कि डिजिटल युग के विलेन को निभाना उनके लिए क्या मायने रखता है।

यह शो उस नाजुक संतुलन को दिखाता है जिसे लोग रोज़ अपनी असली और डिजिटल दुनिया के बीच बनाए रखने की कोशिश करते हैं। शिवाय ने एक बड़े धोखे के बाद इंटरनेट से पूरी तरह दूरी बना ली है, जबकि आध्या उसी डिजिटल दुनिया में एक सफल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में आगे बढ़ रही है। उनकी कहानी दो बिल्कुल अलग सोच के टकराव को दिखाती है, एक जो अविश्वास से भरी है और दूसरी जो डिजिटल दुनिया की संभावनाओं पर विश्वास करती है।
सुधांशु पांडे के अनुसार, यही टकराव इस कहानी को खास बनाता है। जब शिवाय और आध्या की मुलाकात होती है, तो दो अलग दुनिया के बीच प्यार जन्म लेता है। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब यह सच सामने आता है कि आध्या, बलदेव सिंह चौहान की बेटी है, वही व्यक्ति जिसने शिवाय की जिंदगी तबाह कर दी थी। बलदेव के किरदार के जरिए यह शो एक अहम सवाल उठाता है कि क्या इंसान सच में अपने अतीत के किए नुकसान को बदल सकता है।
ड्रामा के साथ-साथ ‘दो दुनिया एक दिल’ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी देता है। साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कलर्स ने गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के साथ सहयोग किया है। सुधांशु का कहना है कि साइबर फ्रॉड सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आज के समय की एक सच्चाई है जिसका सामना कई लोग कर रहे हैं। बलदेव भले ही एक काल्पनिक किरदार हो, लेकिन वह जिस चीज़ का प्रतिनिधित्व करता है, यानी तकनीक का गलत इस्तेमाल और एक छोटी सी गलती से होने वाला बड़ा नुकसान, वह पूरी तरह वास्तविक है।
सुधांशु कहते हैं, “साइबर फ्रॉड सिर्फ कहानी नहीं है। यह हर दिन असली लोगों के साथ हो रहा है। बलदेव एक काल्पनिक किरदार हो सकता है, लेकिन वह जिस खतरे को दिखाता है वह बिल्कुल असली है। कभी-कभी एक गलत क्लिक या किसी के साथ साझा किया गया ओटीपी पूरी जिंदगी बदल सकता है।”
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए सुधांशु बताते हैं कि बलदेव सिंह चौहान ऐसा व्यक्ति है जिसे अपनी बात मनवाने के लिए आवाज़ ऊँची करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उसे सिस्टम और लोगों दोनों को समझना आता है। बलदेव एक छिपा हुआ लोन नेटवर्क चलाता है, जो जरूरतमंद लोगों को कर्ज़ के जाल में फँसाकर उन्हें चुप्पी और डर में जीने के लिए मजबूर कर देता है। हालांकि यह किरदार सिर्फ एक सीधा-सादा विलेन नहीं है। सुधांशु मानते हैं कि बलदेव भी परिस्थितियों और अपने फैसलों का नतीजा है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ेगी, दर्शकों को उसके अतीत की परतें और वह रास्ता देखने को मिलेगा जिसने उसे इस मुकाम तक पहुँचाया।
दिलचस्प बात यह है कि इस किरदार की तैयारी के लिए सुधांशु को किसी खास रिसर्च की जरूरत नहीं पड़ी। उनका मानना है कि हर इंसान अपनी जिंदगी में कभी न कभी ऐसे लोगों से मिला होता है जो ऊपर से आकर्षक और आत्मविश्वासी लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर एक अलग खेल खेल रहे होते हैं। एक अभिनेता के रूप में ऐसे अनुभव किरदारों को समझने और उन्हें जीवंत बनाने में मदद करते हैं।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए सुधांशु मानते हैं कि बलदेव का किरदार निभाने के बाद वह खुद भी ऑनलाइन चीज़ों पर भरोसा करने से पहले ज्यादा सतर्क हो गए हैं। उनके अनुसार सोशल मीडिया ने कलाकारों को दर्शकों से जुड़ने का एक बड़ा मंच दिया है, लेकिन यह अक्सर सिर्फ जिंदगी का एक सजाया हुआ हिस्सा ही दिखाता है। शो में बलदेव इस बात को भली-भांति समझता है कि डिजिटल दुनिया में लोगों की धारणा कितनी ताकतवर हो सकती है और यह किसी की जिंदगी को बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है।
इस शो की शूटिंग का बड़ा हिस्सा आगरा में किया गया है, जिसने कहानी को और भी वास्तविकता दी है। सुधांशु बताते हैं कि इस ऐतिहासिक शहर की जीवंत गलियाँ, यहाँ के लोग और इसकी भव्यता ने शूटिंग के अनुभव को खास बना दिया। असली लोकेशनों पर शूट करने से दृश्यों में एक अलग ही वास्तविकता और ऊर्जा आ जाती है, जिसे किसी सेट पर दोहराना मुश्किल होता है।
अपने प्रशंसकों के लिए आभार व्यक्त करते हुए सुधांशु कहते हैं कि दो दुनिया एक दिल’ की कहानी आज के समय से बहुत जुड़ी हुई है। उनके अनुसार दर्शक इस शो के किरदारों की भावनाओं से जरूर जुड़ेंगे, क्योंकि यह कहानी प्यार, भरोसे और फैसलों के असर को उस दुनिया में दिखाती है जहाँ डिजिटल जिंदगी का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
‘दो दुनिया एक दिल’ देखना न भूलें, हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:00 बजे, केवल कलर्स और जियोहॉटस्टार पर।

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