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दीन धर्म की बात जब आए मजहब मेरा इंसानी लिखना, जब भी मेरी कहानी लिखना मुझको हिंदुस्तानी लिखना: सूफ़ी गफीर सागर चिश्ती

“दीन धर्म की बात जब आए मजहब मेरा इंसानी लिखना, जब भी मेरी कहानी लिखना मुझको हिंदुस्तानी लिखना,” ये शेर पढ़ते हुए सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन, के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूफ़ी गफीर सागर चिश्ती निजामी, ने राष्ट्रीय एकीकरण,हिंदू मुस्लिम एकता और भाईचारे को ,बढ़ाए जाने तथा, कट्टरपंथी शक्तियों पर अंकुश लगाने हेतु, सूफी खानकाह एसोसिएशन का अधिकृत वक्तव्य जारी किया।
उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तानियों के लिए आपसी भाईचारा और रवादारी,सबसे ज़रूरी है,उन्होंने कहा कि हमारे देश में हर मजहब,धर्म और जातियों के फूल खिलते हैं,हम हिंदुस्तानी प्रेम के धागे में बंधी हुई एक खूबसूरत माला हैं,उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सद्भाव और राष्ट्रीय एकीकरण,को बढ़ावा देने वाले कार्य किसी हादसे की वजह से किए जा रहे हैं,बल्कि सदियों से आपसी भाईचारे और प्रेम को बढ़ाने की,हमारे देश की परंपरा रही है,उन्होंने भारत की महान विभूतियों मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चंद्र जी,योगिराज श्रीकृष्ण,महात्मा बुद्ध,महावीर स्वामी इन सभी ने मानवता पर आधारित अपने विचारों को,भारत के कोने कोने में पहुंचाने का कार्य किया है। इन महापुरुषों के बाद हजारों सूफियों ने,पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के लाए, दीन ए मोहम्मदी के पैगाम, पैगामे मोहब्बत को इस मुल्क में बखूबी पेश किया।जिसमे हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती,बाबा फरीद ,हजरत महबूब ए इलाही,और हजरत अमीर खुसरो, बाबा गुरु नानक,कबीर दास जी,तुलसी दास जी जैसे संतों ने जो मोहब्बत के गीत गाए,वो हमारी सांझी विरासत हैं,इनकी कामयाबी का राज़ सबको साथ लेकर चलना है।

प्रस्तुतिकरण-अमन रहमान

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